इतिहास

नीलगिरि चेर साम्राज्य का भाग हुआ करते थे। फिर वे गन्गा सामराज्य के हाथों मे चले गये और फिर १२वीं शताब्दी में होयसल साम्राज्य के राजा विष्णुवर्धन के राज्य मे आ गये। उस के बाद नीलगिरि मैसूर राज्य का हिस्सा बन गये जिस के टीपू सुलतान ने उन्हें १८वीं शताब्दी में अंग्रेजों के हवाले कर दिया।
पड़ोसी कोयम्बटूर जिले के गवर्नर, जॉन सुलिवान को यहाँ की आबो-हवा बहुत पसंद आने लगी और उसने स्थानीय जातियों (टोडा, इरुम्बा और बदागा) से जमीन खरीदनी शुरु कर दी।
ब्रिटिश राज के तहत इन पर्वतों का विकास बहुत तेजी से होने लगा क्योंकि यहाँ की ज्यादातर जमीन यहाँ के अमीर अंग्रेजों की निजी संपत्ती थी। बाद में ऊटी को मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दे दिया गया।

डोडाबेट्टा चोटी

यह चोटी समुद्र तल से 2623 मीटर ऊपर है। यह जिले की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। यह चोटी ऊटी से केवल 10 किमी. दूर है इसलिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से घाटी का नजारा अदभूत दिखाई पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब मौसम साफ होता है तब यहां से दूर के इलाके भी दिखाई देते हैं जिनमें कायंबटूर के मैदानी इलाके भी शामिल हैं।