उल्लू

आजादी के बाद नवनिर्मित स्टाफ कॅालेज को अपना निशान एवं सिदा्न्त चाहिए था । यहाँ के पहले सभादेशक ब्रिगेडियर वर्मा ने क्वेटा स्टाफ कॅालेज के तर्ज पर निशान के रूप में उल्लू एवं सिदा्न्त के रूप में लैटिन वाक्य (दम खम एवं ज्ञान) को अपनानें का निश्चय किया । परन्तु थल सेना मुख्यालय ने निशान को अशुभ एवं अनुपयुत्त कह कर ठुकरा दिया।

ब्रिगेडियर वर्मा ने उल्लू को निशान बनाने के लिए ह्रदय से प्रयत्न किया। उन्होंने सिद्धान्त के रूप हिंदी के दो-तीन सिद्धान्त सुझाव परन्तु उनका हस्त्र भी वही हुआ । सेना मुख्यालय स्टाफ कॅालेज के निशान के रूप में बाज जो अपनाना चाहता था।

इस विवाद के सुलझाने तक ब्रिगेडियर वर्मा ने उल्लू को निशान एवं पुराना सिद्धान्त कायम रखा । बाज् एवं उल्लू की लड़ाई में उल्लू को जीत दिलाने का श्रेय जेनरल लेनटेन को जाता है। अधिकारिक तौर पर तो उल्लू को नहीं अपनाया गया परन्तु इसका इस्तेमाल स्टाफ कॅालेज के निशान के रूप में कायम् रहा। विधालय् के एक प्रान्ध्यापक को कॅालेज को निशान उल्लू के साथ बनाने का काम दिया गया। परन्तु बने हुऐ चित्र में उल्लू, तोते की तरह दिख रहा था। चित्र की पृष्ठभूमि में एक लंगर जोड़े तलवार एवं पंख शामिल थे। चित्र के ऊपरी भाग में अशोक स्तंभ के शेरो को शामिल कर इसे कमल के पत्तो सेस्जाया गया। चित्रकार ने निशान को खुबशूरत बनाने के लिए सात अलग रंगो का इस्तेमाल किया।

स्टाफ कॅालेज के निशान के रूप में अंत्तः उल्लू ने अपना स्थान ब्रकरार रखा । उल्लू के सर पर ताज था । और वह जोड़े तलवार पर विराजमान था । जोड़ा तलवार मंगल (रोमन युद्ध देवता) एवं उल्लू मिनेरवा (ज्ञान की देवी) का निशान है। किम्बरली, क्वेटा, किंग्स्टन (कनाडा) एवं क्वीनस् क्लीक (आस्ट्रेलिया) में स्थित स्टाफ कॅालेजोम का निशान उल्लू है। एंडोवर एवं ब्रैकनेल का निशान बाज एवं लटियर संयुक्त स्टाफ कॅालेज के निशान पर पंखो वाला शेर त्रिशुल पकड़े हुए हैं।

निशान की लड़ाई में उल्लू के प्रश्न पर नौ सेना एवं वायुसेना ने कोई विवाद नहीं किया। इतने विवादों के बीच उल्लू को अधिकारिक संज्ञान मिलने में कुछ और साल लगे। स्टाफ कॅालेज को रक्षा सेवा संस्थान बनने एवं निशान पर नौ सेना एवं वायुसेना के चिन्ह लगने में भी कुछ साल लगे । कई सालो के विवाद के बाद कत्थी रंग की पृष्ठभूमि में जोड़े तलवार पर विराजमान उल्लू को स्टाफ कॅालेज के निशान के रूप में अधिकारिक अनुमति सन् १९६३ में मिली । युद्धम् प्रज्ञा के सिद्धान्त को १९६४ अपनाया गया। बुद्धिमान उल्लू को निशान की लड़ाई जीतने में सोलह साल लगे।